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ग़ज़ल

थके क़दमों से

थके क़दमों से भी आगे हमें बढ़ जाना आता है

ख़िजा़ं के दौर में भी बाग़ को महकाना आता है

वही इस दौर में सबसे सफल है तुझको लगता है

जिसे झुक जाना आता पांव में गिर जाना आता है?

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