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शेर

बहका रही हैं ख़्वाबों

रोती है ख़ूं के अश्क ये अखियां मैं क्या करूं

बहका रही हैं ख़्वाबों की परियां मैं क्या करूं

शोलों की तलाश शरर भी नहीं मिला

रिश्तों का सर्द सर्द बियाबां मैं क्या करूं

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