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ग़ज़ल

हमने सिखा दिए उन्हें

जब रस्मो-रहे-जी़स्त का उक़्दा खुला न था
पोशीदा राज़ कोई भी फिर रह गया न था

पहले कभी ना दिल पे पड़ी थी ये ज़रबे-ग़म
जीवन में मैकशी का कोई सिलसिला ना था

यह सब कसूर इश्क़ की गुलकारियों का है
वरना तो जान लीजे कि मैं सरफिरा ना था

हमने सिखा दिए उन्हें तीरे-नज़र के वार
इस फ़न को अहले-हस्न कोई जानता न था

ख़ुशियां थी ज़िन्दगानी में राजन के जब मेरे
दिल में किसी के प्यार का कांटा चुभा ना था


रस्मो-रहे-जीस्त: जीवन पथ की रीत
उक्दा: रहस्य
पोशीदा : छुपा हुआ
ज़रबे-गम : दुख की चोट
मैकशी :सुरापान

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