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ग़ज़ल

हमने सिखा दिए उन्हें

जब रस्मो-रहे-जी़स्त का उक़्दा खुला न थापोशीदा राज़ कोई भी फिर रह गया न था पहले कभी ना दिल पे पड़ी थी ये ज़रबे-ग़मजीवन में मैकशी का कोई सिलसिला ना था यह सब कसूर इश्क़ की गुलकारियों का हैवरना तो जान लीजे कि मैं सरफिरा ना था हमने सिखा दिए उन्हें तीरे-नज़र के वारइस फ़न […]

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ग़ज़ल

याद है डूबा था मैं इस के

ज़िंदगानी में वजुज़ यादे-खुदा कुछ भी नहीं ख्व़ाबे-रंगी है जहां ग़म के सिवा कुछ भी नहीं बादाख़्वारी काम आ सकती नहीं इंसान के मैकदे में मय परस्ती के सिवा कुछ भी नहीं मौज थी वह या कि तूफा़ं या लहर थी या भंवर याद है डूबा था मैं इसके सिवा कुछ भी नहीं एक ग़लत […]

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ग़ज़ल

वह थी कभी इस दिल की

जो छोड़ के आया हूं वो सब भूल गया हूं मत याद दिलाओ मुझे जब भूल गया हूं खु़शियों को बता दो मेरे दरवाजे़ खुले हैं माज़ी के सितम वाले सबब भूल गया हूं कहते हैं कि मैं चीख़ता फिरता हूं मुसलसल क्या दरसे-मुहब्बत का अदब भूल गया हूं यह गर्दिशे-दौरा मुझे सब कुछ ना […]

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ग़ज़ल

हारा है जो दौड़ो के

यादों की बस्ती में या वीरानों में ढूंढना गर उसको, ढूंढो दीवानों में झुंड परिंदों का अब इतना स्याना है पढ़ लेता है क्या लिखा है दानों में फूलों से सब तितली दूर भगानी हैं लिखा है संदेशा यह तूफ़ानों में कछुआ क्यों ना यार पर हो जाए कु़र्बा हारा है जो दौड़ो के मैदानों […]

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ग़ज़ल

मुझको बिछड़ने का है मलाल

वह मुझको भूल गया उसको है कमाल बहुत उसी से मुझको बिछड़ने का है मलाल बहुत मैं अपना सर न झुकाता तो और क्या करता वह मुझसे कर रहा था सीधे से सवाल बहुत नए जमाने की कोंपल हैं दो दुआ उनको ये बच्चे कर रहे हैं आजकल धमाल बहुत ये सच है उसकी मैं […]

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ग़ज़ल

ज़माने में फ़जीहत होगी

वक्त़ गर साथ तो कि़ स्मत की इनायत होगी वरना हर सम्त ज़माने में फ़जीहत होगी जिसके पिंदार में हर वक्त़़ ही दौलत होगी कब भला उसके दिल-ओ-जां में मुहब्बत होगी तुझको मालूम नहीं जाने-जिगर जाने-हया गुल से भी छू लूं तेरे लब तो क़यामत होगी जो भी जीवन में किसी ठौर तलक पहुंचा है […]

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ग़ज़ल

कोई भी आए न आए

हमें है रास तुम्हारा नगर कुछ ऐसा है खु़शी के साथ कटेगा सफ़र कुछ ऐसा है कि जैसे-जैसे बड़ी उम्र ये हुआ बूढ़ा के अहदे-तिफ़ली का दिल में शजर कुछ ऐसा है कोई भी आए न आए ये राह देखेगा हमारा देख दिले-मुन्तजि़र कुछ ऐसा है कोई न दर खुले आवाज़ पर न खिड़की ही […]

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तस्वीरे- रंगो -नूर

हूं जामो- मय से दूर तुझे देखने के बाद बढ़ने लगा सुरूर तुझे देखने के बाद तस्वीरे- रंगो -नूर तुझे देखने के बाद देखेगा कौन हूर तुझे देखने के बाद मेरा जुनूने-शौक़ भी अब कुछ संवर गया ऐ हुस्ने- बा -शऊर तुझे देखने के बाद उठती नहीं है जामो- सुबू की तरफ़ निगाह दिल है […]

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ग़ज़ल

वो मयख़ाना हो गया

दिल अपना तेरी बात से शर्मिंदा हो गया सब लोग कह रहे हैं कि तू कैसा हो गया खुलकर कही जो बात तो तेवर बदल गए सच बात का नतीजा बुरा जैसा हो गया साक़ी-ए-बददिमाग़ हमें यां से मत उठा बैठे हैं हम जहां भी वो मयख़ाना हो गया फिर लौट के आया हूं मैं […]

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ग़ज़ल

रात भर तक तो साथ-साथ चलो

लम्हा भर तक तो साथ-चलो रह-गुज़र तक तो साथ-साथ चलो मेरी कि़स्मत इलाज हो कि ना हो चारागर तक तो साथ-साथ चलो ज़ुल्मते-शब का दम जहां टूटे उस सहर तक तो साथ-साथ चलो फिर दमे-सुबह आपकी मर्जी़ रात भर तक तो साथ-साथ चलो अगले जन्मों में देखा जाएगा इस सफ़र तक तो साथ-साथ चलो जिस […]